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कोरबा.... ये तो हद हो गयी :शिवाय में घोर लापरवाही से खराब हुई मृत देह,,भगवान न करे किसी के साथ ऐसा न हो जैसा इस परिवार के साथ हुआ
USA से आया पुत्र नहीं देख सका.....

कोरबा। प्रारंभिक तौर पर अस्पताल संचालन के लिए आवश्यक चिकित्सकीय मानकों और 100 बिस्तर अस्पताल होने के बावजूद मात्र प्रोविजनल लाइसेंस के आधार पर अस्पताल का संचालन कर रहे शिवाय हॉस्पिटल प्रबंधन की एक बड़ी और घोर लापरवाही सामने आई है। इस लापरवाही ने एक परिवार की संवेदना को तार-तार करते हुए भावनात्मक रूप से काफी आहत किया है। पिता का अंतिम दर्शन करने के लिए बेटा सात समंदर पार से कोरबा लौटा लेकिन शव खराब हो जाने की वजह से उसे काफी ठेस पहुंची। मर्माहत बेटे व परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन को काफी खरी- खोटी सुनाई। हंगामा की सूचना पर पुलिस भी पहुंची थी।

दरअसल, कोरबा शहर के निवासी एक प्रतिष्ठित परिवार के मुखिया की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें शिवाय हॉस्पिटल टीपी नगर में भर्ती कराया गया। यहां उनकी मृत्यु हो जाने उपरांत चूंकि परिवार के सदस्य तो मौजूद थे लेकिन विदेश में रह रहे पुत्र का आना तत्काल संभव नहीं हो सकता था, इसलिए मृत देह को अस्पताल की निगरानी में ही डीप फ्रीजर में रखवाने की व्यवस्था की गई। आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद मृत देह को डीप फ्रीजर में अस्पताल प्रबंधन ने रखवा तो दिया किंतु इसका स्विच ऑन करना भूल गए। 19 अप्रैल से लेकर 21 अप्रैल तक यह मृत देह डीप फ्रीजर में पड़ी रही जिसकी वजह से शव डीकंपोज होने लगा।

आज 21 फरवरी को जब बेटा सात समुंदर पार से लौटा और शव सुपुर्द में लेने के लिए डीप फ्रीजर खोला गया तो हालत कुछ और ही थी। पिता के मृत देह की यह स्थिति देखकर बेटा भड़क उठा। उसके आंसू छलकने लगे लेकिन अपनी भावनाओं पर काबू करते हुए अस्पताल प्रबंधन को काफी खरी-खोटी सुनाई। मौजूद प्रबंधन के लोग इधर-उधर बगलें झांकते बात-बात एक्सक्यूज करते नजर आए।

हालांकि, इस परिवार ने अपनी पीड़ा को दोहरा होते देखा फिर भी अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ फिलहाल किसी तरह की कार्रवाई नहीं कराई है। हंगामे की सूचना पर मौके पर सीएसईबी चौकी पुलिस पहुंच गई थी। वह काफी देर तक यहां मौजूद रही और समझाइश का काम किया जाता रहा। अंततः शव को परिजन अंतिम संस्कार के लिए साथ ले गए। इस विषय में सीएसईबी पुलिस सहायता केंद्र प्रभारी एसआई राजेश तिवारी से जानकारी लेने के लिए संपर्क किया गया, किंतु उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। पीड़ित परिवार की भावना को समझते हुए उनकी पहचान गोपनीय रखी गई है।

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