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रायपुर।* छत्तीसगढ़ की लोक कला की पहचान और पंडवानी की विश्व प्रसिद्ध गायिका पद्म विभूषण तीजन बाई का गुरुवार को रायपुर AIIMS में निधन हो गया। वे 70 वर्ष की थीं। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई।
तीजन बाई लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं। उन्हें उपचार के लिए रायपुर AIIMS में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।
*माटी की आवाज को दी वैश्विक पहचान*
गनियारी गांव की तीजन बाई ने तंबूरे की एक तान पर महाभारत की कथाओं को जीवंत कर दिया। उन्होंने पंडवानी को गांव की चौपाल से निकालकर देश-दुनिया के बड़े मंचों तक पहुंचाया। फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका सहित कई देशों में उन्होंने छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया।
केंद्र सरकार ने उनकी कला को देखते हुए 1988 में पद्म श्री, 2003 में पद्म भूषण और 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया। वे पद्म विभूषण पाने वाली छत्तीसगढ़ की पहली महिला थीं।
*राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार*
मुख्यमंत्री ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा, "तीजन बाई के रूप में छत्तीसगढ़ ने अपनी सबसे बड़ी लोक कलाकार खो दी है। उनकी आवाज आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी।"
राज्यपाल और संस्कृति मंत्री ने भी शोक जताया है। शासन ने तीजन बाई का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ कराने का निर्णय लिया है।
तीजन बाई के निधन से कला जगत में अपूरणीय क्षति हुई है। उनके प्रशंसक और कलाकार AIIMS के बाहर श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं।
*तीजन बाई - एक नजर में*
*जन्म*: 24 अप्रैल 1956, गनियारी, सक्ती जिला
*विधा*: पंडवानी गायन
*सम्मान*: पद्म श्री 1988, पद्म भूषण 2003, पद्म विभूषण 2019
ॐ शांति 🙏
