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बिग ब्रेक कोरबा....शिवाय हॉस्पिटल में फिर हुआ कांड...वेंटिलेटर के झूठे आश्वासन पर 3 घंटे भटकता रहा मरीज, मौत के बाद परिजनों ने कलेक्टर से की शिकायत
हॉस्पिटल प्रबंधन और स्वप्निल झा पर लापरवाही का आरोप।

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनहीनता और गंभीर लापरवाही को उजागर करने वाला एक अत्यंत दुखद मामला सामने आया है। जिला अस्पताल में उपचाराधीन एक 29 वर्षीय युवा मरीज की तबीयत बिगड़ने के बाद समय पर वेंटिलेटर, सोनोग्राफी और सीटी स्कैन जैसी बुनियादी आपातकालीन सुविधाएं नहीं मिलने तथा निजी अस्पतालों के चक्कर काटने के कारण आखिरकार उसकी जान चली गई। मृतक अपने पीछे अपनी पत्नी और महज छह महीने के छोटे से मासूम बच्चे को छोड़ गया है। इस पूरी दुखद घटना के बाद मृतक के परिजनों ने जिला दंडाधिकारी (कलेक्टर) के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई है और शिवाय हॉस्पिटल प्रबंधन, विशेष रूप से स्वप्निल झा, की घोर लापरवाही को उजागर करते हुए कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।प्राप्त जानकारी और कलेक्टर को दी गई शिकायत पत्र के अनुसार, जांजगीर-चांपा जिले के कचंदा निवासी अरुण दास (उम्र 29 वर्ष) को 14 सितंबर 2026 को इलाज के लिए जिला अस्पताल कोरबा में भर्ती कराया गया था। 15 सितंबर को इलाज के दौरान अचानक मरीज की शारीरिक स्थिति बिगड़ने लगी और उसे सांस लेने में भारी तकलीफ का सामना करना पड़ा। मरीज की नाजुक हालत को देखते हुए उसे श्वास मशीन यानी वेंटिलेटर तो लगाया गया, लेकिन उसकी स्थिति में सुधार होने के बजाय लगातार गिरावट आती रही। परिजनों का आरोप है कि इस बेहद नाजुक स्थिति में भी जिला अस्पताल में न तो सोनोग्राफी कराई जा सकी और न ही सीटी स्कैन की सुविधा मिल पाई, जिससे मरीज की वास्तविक स्थिति का समय पर सही आंकलन नहीं हो सका।

 

जिला अस्पताल में बिगड़ती हालत को देखते हुए परिजनों ने निर्णय लिया कि मरीज को किसी बेहतर निजी अस्पताल में स्थानांतरित किया जाए ताकि उसकी जान बचाई जा सके। इसी क्रम में रात करीब 11:40 बजे परिजनों ने ट्रांसपोर्ट नगर स्थित शिवाय हॉस्पिटल में संपर्क किया। परिजनों का स्पष्ट रूप से कहना है कि उन्होंने शिवाय हॉस्पिटल के स्वप्निल झा से दूरभाष पर बातचीत कर वेंटिलेटर की उपलब्धता के संबंध में विस्तार से जानकारी ली। बातचीत के दौरान स्वप्निल झा द्वारा परिजनों को यह कहकर पूरी तरह आश्वस्त किया गया कि अस्पताल में वेंटिलेटर की व्यवस्था उपलब्ध है और वे मरीज को तुरंत यहां ले आएं।

 

स्वप्निल झा के इस आश्वासन के बाद परिजन तुरंत वेंटिलेटर की सुविधा से लैस एम्बुलेंस का प्रबंध करके रात लगभग 12:30 से 1:00 बजे के बीच मरीज को लेकर शिवाय हॉस्पिटल पहुंचे। हालांकि, शिवाय हॉस्पिटल पहुंचने पर परिजनों को गहरा झटका लगा जब अस्पताल के डॉक्टरों ने कथित तौर पर यह कह दिया कि वहां कोई भी वेंटिलेटर खाली नहीं है। स्वप्निल झा द्वारा दी गई गलत और भ्रामक जानकारी के कारण अत्यंत गंभीर स्थिति में पहुंचा मरीज बिना इलाज के अस्पताल के बाहर ही खड़ा रहा।

 

दूसरे और हॉस्पिटल का चक्कर लगाने के बाद परिजन एक बार फिर उम्मीद लेकर एम्बुलेंस की सहायता से मरीज को लेकर शिवाय हॉस्पिटल पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। वहां मौजूद डॉक्टरों ने मरीज का परीक्षण कर उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों का आरोप है कि केवल शिवाय हॉस्पिटल के स्वप्निल झा द्वारा शुरुआत में दी गई गलत जानकारी और लापरवाही के कारण मरीज को लगभग 2 से 3 घंटे तक वेंटिलेटर वाली एम्बुलेंस में एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकना पड़ा। यदि शुरुआत में ही सही स्थिति बता दी गई होती, तो परिजन मरीज को सीधे किसी अन्य सक्षम अस्पताल ले जाते और शायद उसकी जान बच सकती थी।

 

मृतक अरुण दास के चाचा कैलाश दास और अन्य परिजनों ने जिला कलेक्टर से गुहार लगाते हुए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय प्रशासनिक व चिकित्सकीय जांच कराने की मांग की है। परिजनों ने मांग की है कि शिवाय अस्पताल और स्वप्निल झा द्वारा बरती गई इस गंभीर लापरवाही की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह के दर्दनाक हादसे का सामना न करना पड़े।

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